मेरा आकाश मुझको दिख रहा है।
काश! मैं इसमे उड़ानें भर सकूं।
मेरे परिवेश में उड़ते परिन्दों!
मैं तुम्हारे सामने झोली पसारे हूं।
मुझे भी पंख की विद्या सिखा दो।
मेरे इन बाजुओं में पंख ला दो।
ख़ुदा की देन है यह पंख, सच है।
मैं कब इन्कार करती हूं।
किन्तु मेरे ठीक भीतर धधकता अंगार है इक,
जो मुझे आकाश की ऊंचाइयों में
चहचहाने को यूं ही मजबूर करता है।
यह अंगारा मेरी सबसे बड़ी सौगात है।
फ़रिश्तों के जगत की साध है यह।
ख़ुदा के नेक-बक्शे बहुत से
दिलकश नजारों में यही जलवा दिखाता है।
खुले आकाश में उड़ना अगर कोई सिखाता है,
तो सिर्फ़ यह ही सिखाता है।
यह मेरा धधकता अंगार मेरे रास्ते रौशन करेगा
और मेरी साध उड़ पाये, कुछ ऐसा फ़न करेगा।
काश! मैं इसमे उड़ानें भर सकूं।
मेरे परिवेश में उड़ते परिन्दों!
मैं तुम्हारे सामने झोली पसारे हूं।
मुझे भी पंख की विद्या सिखा दो।
मेरे इन बाजुओं में पंख ला दो।
ख़ुदा की देन है यह पंख, सच है।
मैं कब इन्कार करती हूं।
किन्तु मेरे ठीक भीतर धधकता अंगार है इक,
जो मुझे आकाश की ऊंचाइयों में
चहचहाने को यूं ही मजबूर करता है।
यह अंगारा मेरी सबसे बड़ी सौगात है।
फ़रिश्तों के जगत की साध है यह।
ख़ुदा के नेक-बक्शे बहुत से
दिलकश नजारों में यही जलवा दिखाता है।
खुले आकाश में उड़ना अगर कोई सिखाता है,
तो सिर्फ़ यह ही सिखाता है।
यह मेरा धधकता अंगार मेरे रास्ते रौशन करेगा
और मेरी साध उड़ पाये, कुछ ऐसा फ़न करेगा।
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