Wednesday, November 29, 2023

नीन्द

कुछ उमड़ रहा है,
नसों में, पोरों में,
धड़कनों में, साँसों में,
और उच्छ्वासों में;
नीन्द
रात का अन्धेरा
दिन के उजाले को
लील गया है ।
और 
अंधेरे की दुल्हन नींद भी
कहीं छुप गई है।

सब घरों की बत्तियाँ गुल हैं,
चहुँ ओर पसरा सन्नाटा 
चीख चीख कर कह रहा है,
“सो जाओ; सो जाओ ।”

दुलारी निन्दिया !
अब तो आ ही जाओ
पलकों की छाँव में;
थक गई हूँ,
ले लो अपनी 
दिलकश पनाहों में ।

ओउम्  शान्ति: शान्ति: शान्ति: ।

Tuesday, November 21, 2023

बावरा मन !
बहुत देर से समझा रही हूँ।
समझता ही नहीं।
कहता है,
वर्ल्ड कप तो हमारा था।
कोई छीन कर ले गया।

Sunday, November 19, 2023

सहज, सुन्दर और सुभग
शुभ पँख मेरे,
भव्य और ऊँचे इसी आकाश ने
मुझको दिये थे।

मैं इन्हीं का आसरा ले कर
धरा के धाम पर
चहुँ ओर
जाती थी ;
चहकती, फुदकती चिड़िया-सरीखी।

और फिर इक दिन
मेरे ये पँख घायल हो गये।

भगवान्! 
नत-मस्तक खड़ी हूँ सामने तेरे।
ये मेरे पँख घायल हैं,
इन्हें तुम स्वस्थ कर दो।

मैं धरा के धाम पर 
फिर से चहकना चाहती हूँ।

भगवान्! तुम सर्वज्ञ हो !
और
सर्वशक्तिमान भी हो!
क्या कहूँ तुमसे !
अटल सौभाग्य का वर दो मुझे।

छठ का पर्व
सुहाता है,
जब जल में खड़ी
व्रती महिला 
के दिव्य तेज से दीप्त, 
सुशोभित माथे पर
सिन्दूर संवर कर
अपनी छवि 
बिखराता है ।

“उगींऽऽ न सुरुज देव ऽ”
स्वर-लहरी,
भगवान् सूर्य को
शीघ्र प्रकट होने का 
आग्रह और मनुहार;

“बनीं न बलम जी कँहरिया”
कह कर छठी मैय्या से
“ पिया के सनेहिया”
बनने का आशीष-भरा
अनुपम उपहार;

फल-फूलों से भरे 
सूप को ले कर
जल में खड़ी
प्रार्थना-रत
व्रती महिला !
तुम को 
मेरा अभिनन्दन और वन्दन ।

Wednesday, November 1, 2023

रँजना नहींरही।

रँजना नहीं रही।
जान कर बहुत दु:ख हुआ ।

अलीगढ़ में
लेखराज नगर की
अपनी
भव्य हवेली में 
हमेशा
हमारी अगवानी करने वाली 
रँजना
अब नहीं रही।

अपने लम्बे क़द, 
गोरे रंग 
और 
टोहती आँखों के वैभव से 
सबको
बरबस
अपनी ओर आकर्षित करने वाली
रँजना 
अब नहीं रही।
 
हर पारिवारिक उत्सवों में
सम्पूर्ण आन,बान और शान से
तपाक से
मिलने वाली 
रँजना
अब नहीं रही।

सहज भाव से 
मुझे ‘भाभी’ कहने वाली 
रँजना
अबनहीं रही।

मन बहुत बोझिल है ।
जाना तो सब को है ।
पर
इस उम्र में ??
इस तरह ??

मन बहुत बोझिल है ।
आँसुओं ! 
कुछ तो मन को
हल्का कर दो।
उसके अच्छे व्यवहार का 
भारी-भरकम
क़र्ज़ है मुझ पर ।
कैसे चुका पाऊँगी ?
कैसे ??
कैसे ??