Sunday, November 19, 2023

सहज, सुन्दर और सुभग
शुभ पँख मेरे,
भव्य और ऊँचे इसी आकाश ने
मुझको दिये थे।

मैं इन्हीं का आसरा ले कर
धरा के धाम पर
चहुँ ओर
जाती थी ;
चहकती, फुदकती चिड़िया-सरीखी।

और फिर इक दिन
मेरे ये पँख घायल हो गये।

भगवान्! 
नत-मस्तक खड़ी हूँ सामने तेरे।
ये मेरे पँख घायल हैं,
इन्हें तुम स्वस्थ कर दो।

मैं धरा के धाम पर 
फिर से चहकना चाहती हूँ।

भगवान्! तुम सर्वज्ञ हो !
और
सर्वशक्तिमान भी हो!
क्या कहूँ तुमसे !
अटल सौभाग्य का वर दो मुझे।

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