Wednesday, November 1, 2023

रँजना नहींरही।

रँजना नहीं रही।
जान कर बहुत दु:ख हुआ ।

अलीगढ़ में
लेखराज नगर की
अपनी
भव्य हवेली में 
हमेशा
हमारी अगवानी करने वाली 
रँजना
अब नहीं रही।

अपने लम्बे क़द, 
गोरे रंग 
और 
टोहती आँखों के वैभव से 
सबको
बरबस
अपनी ओर आकर्षित करने वाली
रँजना 
अब नहीं रही।
 
हर पारिवारिक उत्सवों में
सम्पूर्ण आन,बान और शान से
तपाक से
मिलने वाली 
रँजना
अब नहीं रही।

सहज भाव से 
मुझे ‘भाभी’ कहने वाली 
रँजना
अबनहीं रही।

मन बहुत बोझिल है ।
जाना तो सब को है ।
पर
इस उम्र में ??
इस तरह ??

मन बहुत बोझिल है ।
आँसुओं ! 
कुछ तो मन को
हल्का कर दो।
उसके अच्छे व्यवहार का 
भारी-भरकम
क़र्ज़ है मुझ पर ।
कैसे चुका पाऊँगी ?
कैसे ??
कैसे ??

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