Sunday, October 19, 2014

हैलो ज़िन्दगी !

चहूँ ओर फैली
खिलखिलाती धूप-सी रौशन
मेरी यह ज़िन्दगी,
सब तरफ से सिमट, सकुचा कर
सभी से दर-किनारा कर,
बुढ़ापे की किन्ही
अन्धी गुफाओं की तरफ
अब बढ़ रही है।

सहज सम्भव है
गुफाओं में
कहीं
कोई
छुपा
कोहिनूर मिल जाये,
जो मेरी अस्मिता की
ढ़ाल बन कर के
मुझे
गन्तव्य की
शुभ राह दिखलाये ।

Sunday, July 20, 2014

अनिका को

अनिका को
अनिका ! मेरी पोती !
रूप अपना दिव्य ले कर
तुम मेरे घर आ गई हो ।
भव्य स्वागत है तुम्हारा ।

लाड़ली पोती !
कि तुम नव्या निराली हो ।
सहज, सुन्दर, सुभग, नाज़ुक़
फूल-सी सुकुमार, आकर्षक;

कि तुम लक्ष्मी-स्वरुपा हो,
उजाला ले कर आई हो ,
 तुम्हारे आगमन से, सच कहँू ?
मन के सभी कोने
अज़ब-सी रौशनी पा कर
यूँ ही चुंधिया गये हैं।

और मैं भौंचक बनी,
हैरान-सी हो कर
सहज फिर समझ पाती हूँ
'दिव्यता सचमुच विराजी है मेरे घर
रूप धर पोती का मेरी
छवि मनोहर ।'

कि तुम दिव्या-दुलारी हो !
इसलिये अब सब तरफ
आनन्द ही आनन्द बरसेगा ।
कि खुशियाँ राह में बिछ कर
तुम्हारी बाट जोहेंगी ।

और तुम
सुःख, स्वास्थ्य, वैभव की
परम गरिमा से भूषित हो
सुभग सौभाग्य को कर प्राप्त
मंगल-गीत गाओगी ।

तुम्हारे ही लिये ऋतुयें
निरन्तर बाँसुरी की तान पर
लय-बद्ध हो कर
नृत्य का उत्सव मनायेंगी ।

कि तुम मांगी हुई मन्नत हो मेरी,
इसलिये भगवान को
शत-शत नमनम कर के
तुम्हारी दीर्घ आयु की
दुआयें  मांगती हूँ।

मेरी दिव्या -दुलारी
सहज , सुन्दर
लाड़ली पोती !
सुखःद जीवन हो तुम्हारा
फूल -सी महको धरा की गोद में ;
और इस तरह चहको
कि यह आकाश भी
यश से तुम्हारे गूँज जाये;
और
यह पर्वत हिमालय भी
तुमाारी ही
पताकायें सजाये ।





मेरी पोती

महालक्ष्मी पधारी हैं
मेरे घर आज,
रूप धर पोती का मेरी ।
क्यों न मैं दीये जलाऊँ
और दिवाली मनाऊँ!!!

Friday, June 6, 2014

Australia

I love staying in Australia...
Because my son stays here.
My grandson is here.
My daughter-in-law stays here.
And
I am waiting my grand

Me, in Australia

It is wonderful...
In the morning I enjoy the Sun...
Then clouds...
And finally rains in the evening...
It is really cold at night.