'कही सुनी'... ये मेरा blog है।
यहाँ मैं कहूँगी... कुछ अपनी, कुछ जग की...
और सुनूँगी... आप सभी की...
जीवन की यात्रा, एक विचित्र यात्रा है।
यहाँ हर समय, कुछ न कुछ घटता रहता है।
कुछ अच्छा... कुछ बुरा...
दोनों का अपना स्वाद है, अपना रस है।
बेस्वाद कोई भी नहीं है।
इन रसों का आस्वादन कराऊँगी मैं...
अपनी इस 'कही सुनी' के माध्यम से...
आप सभी को...
Sunday, July 20, 2014
मेरी पोती
महालक्ष्मी पधारी हैं
मेरे घर आज,
रूप धर पोती का मेरी ।
क्यों न मैं दीये जलाऊँ
और दिवाली मनाऊँ!!!
No comments:
Post a Comment