अनिका को
अनिका ! मेरी पोती !
रूप अपना दिव्य ले कर
तुम मेरे घर आ गई हो ।
भव्य स्वागत है तुम्हारा ।
लाड़ली पोती !
कि तुम नव्या निराली हो ।
सहज, सुन्दर, सुभग, नाज़ुक़
फूल-सी सुकुमार, आकर्षक;
कि तुम लक्ष्मी-स्वरुपा हो,
उजाला ले कर आई हो ,
तुम्हारे आगमन से, सच कहँू ?
मन के सभी कोने
अज़ब-सी रौशनी पा कर
यूँ ही चुंधिया गये हैं।
और मैं भौंचक बनी,
हैरान-सी हो कर
सहज फिर समझ पाती हूँ
'दिव्यता सचमुच विराजी है मेरे घर
रूप धर पोती का मेरी
छवि मनोहर ।'
कि तुम दिव्या-दुलारी हो !
इसलिये अब सब तरफ
आनन्द ही आनन्द बरसेगा ।
कि खुशियाँ राह में बिछ कर
तुम्हारी बाट जोहेंगी ।
और तुम
सुःख, स्वास्थ्य, वैभव की
परम गरिमा से भूषित हो
सुभग सौभाग्य को कर प्राप्त
मंगल-गीत गाओगी ।
तुम्हारे ही लिये ऋतुयें
निरन्तर बाँसुरी की तान पर
लय-बद्ध हो कर
नृत्य का उत्सव मनायेंगी ।
कि तुम मांगी हुई मन्नत हो मेरी,
इसलिये भगवान को
शत-शत नमनम कर के
तुम्हारी दीर्घ आयु की
दुआयें मांगती हूँ।
मेरी दिव्या -दुलारी
सहज , सुन्दर
लाड़ली पोती !
सुखःद जीवन हो तुम्हारा
फूल -सी महको धरा की गोद में ;
और इस तरह चहको
कि यह आकाश भी
यश से तुम्हारे गूँज जाये;
और
यह पर्वत हिमालय भी
तुमाारी ही
पताकायें सजाये ।
अनिका ! मेरी पोती !
रूप अपना दिव्य ले कर
तुम मेरे घर आ गई हो ।
भव्य स्वागत है तुम्हारा ।
लाड़ली पोती !
कि तुम नव्या निराली हो ।
सहज, सुन्दर, सुभग, नाज़ुक़
फूल-सी सुकुमार, आकर्षक;
कि तुम लक्ष्मी-स्वरुपा हो,
उजाला ले कर आई हो ,
तुम्हारे आगमन से, सच कहँू ?
मन के सभी कोने
अज़ब-सी रौशनी पा कर
यूँ ही चुंधिया गये हैं।
और मैं भौंचक बनी,
हैरान-सी हो कर
सहज फिर समझ पाती हूँ
'दिव्यता सचमुच विराजी है मेरे घर
रूप धर पोती का मेरी
छवि मनोहर ।'
कि तुम दिव्या-दुलारी हो !
इसलिये अब सब तरफ
आनन्द ही आनन्द बरसेगा ।
कि खुशियाँ राह में बिछ कर
तुम्हारी बाट जोहेंगी ।
और तुम
सुःख, स्वास्थ्य, वैभव की
परम गरिमा से भूषित हो
सुभग सौभाग्य को कर प्राप्त
मंगल-गीत गाओगी ।
तुम्हारे ही लिये ऋतुयें
निरन्तर बाँसुरी की तान पर
लय-बद्ध हो कर
नृत्य का उत्सव मनायेंगी ।
कि तुम मांगी हुई मन्नत हो मेरी,
इसलिये भगवान को
शत-शत नमनम कर के
तुम्हारी दीर्घ आयु की
दुआयें मांगती हूँ।
मेरी दिव्या -दुलारी
सहज , सुन्दर
लाड़ली पोती !
सुखःद जीवन हो तुम्हारा
फूल -सी महको धरा की गोद में ;
और इस तरह चहको
कि यह आकाश भी
यश से तुम्हारे गूँज जाये;
और
यह पर्वत हिमालय भी
तुमाारी ही
पताकायें सजाये ।
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