Friday, September 23, 2016

मेरे शुभ श्रेष्ठ गायक !

अभीप्सा के सुरों के श्रेष्ठ गायक !
मैं तुम्हारी जीत का आह्वान करती हूँ ।
तुम्ही तो हो जो मुझको परिधि की
सीमा के बाहर खींच लाते हो ।
तुम्ही तो हो जो मेरे फड़फड़ाते पँखहीन
शरीर को आकाश की गरिमा बताते हो ।
तुम्ही तो हो जो मेरे रिस रहे नासूर पर
आश्वस्ति का चन्दन-भरा मरहम लगाते हो ।

मैं कैसे भूल सकती हूँ तुम्हें शुभ श्रेष्ठ गायक !
तुम
मेरी भवितव्यता को मोड़ कर ऐसी दिशा दो ।
जिसमें
मेरी अस्मिता सम्पूर्ण छवि के साथ मुखरित हो ।
और
दिशान्तों के सभी अन्धे गव्हर में भी
प्रभा का पुँज बन कर झर पड़े ।
और
मेरे रिस रहे नासूर की इस वेदना का स्वर
इसी आकाश की ऊंचाइयों को चूम ले ।

ये मेरी परिधि की सीमा

परिधि की सीमा
सिमट, सकुचा
सिकुड़ कर
सांस की गति
रोक देती है ।

ये नासारन्ध्र
 की दहलीच पर
आमरण अनशन-सा
सजा कर
सूक्ष्म पथ को छेंक लेती है ।

मैं वात्या के
प्रचण्ड प्रहार से
इस परिधि को
विस्तृत करूंगी,
तभी इस को वरूंगी ।

Monday, September 19, 2016

Ode to Rashmi

Uhप्रिय रश्मि !
सोचती हूँ...
मैं किस रश्मि को जानती हूँ !!
अनेकों आकृतियाँ यादों के झरोखों से झाँक रही हैं !!!

सो कर उठी,
अनुहाई,
मासूम 'वाणी' को
गोद में बैठा कर
उसके बाल संवारती,
माँ-सी मौसी को ? ?

सड़कों पर कार दौड़ाती,
हॉर्न पर हॉर्न बजाती,
सुरक्षित, सकुशल
गन्तव्य तक पहुंचती, पहुंचाती,
ड्राइवर की सीट पर बैठी
आत्म-विश्वास से भरपूर
रश्मि को ???

किट्टी-पार्टी में जाने के लिये
सजती, संवरती,
नई सलवार में नाड़ा सरकाती,
पाँव के नाखूनों में
कुशल ब्यूटीशियन की तरह
नेल-पॉलिश लगाती;
बजते फोन को उल्लास से उठाती,
'हैलो आँटी' कह कर
स्नेहिल मुस्कान के साथ
बतियाती रश्मि को ???

अभ्यागतों का स्वागत, सम्मान करती,
अपने आराम की परवाह न कर के,
दूसरों को सुख पंहुचाती;
सुघड़ गृहिणी का धर्म
सम्पूर्ण कुशलता के साथ निभाती,
सामर्थ्य की साक्षात् मूर्ति बनी
रश्मि को ???

मेरे विषाद के क्षणों में
दिन-रात अपने सहयोग से
मेरी शक्ति का सम्बल बन
रश्मि !
तुम्हें अनेक अनेक धन्यवाद !
Yes,
RASHMI !
I love you and respect you
For all these easons.

Sharmistha

रश्मि गोयल के जन्मदिन पर...

प्रिय रश्मि !
लो आज फिर
सुन्दर, सुहाना
और प्यारा-सा
जनम का दिन तुम्हारा
आ विराजा है ।

हवाओं की पलक पर बैठ कर
यह मुदित मन मेरा
तुम्हें
आशीष देता है
कि
तुम
सु:ख-शान्ति की मृदु पालकी में
बैठ कर
सुन्दर, सुखद जीवन बिताओ!
परम सौभाग्य को कर प्राप्त
यूँ ही सूर्य की रश्मि सरीखी
महकती मुस्कान बिखराओ ।
हमेशा खुश रहो !


शुभेच्छु
शर्मिष्ठा