Monday, September 19, 2016

Ode to Rashmi

Uhप्रिय रश्मि !
सोचती हूँ...
मैं किस रश्मि को जानती हूँ !!
अनेकों आकृतियाँ यादों के झरोखों से झाँक रही हैं !!!

सो कर उठी,
अनुहाई,
मासूम 'वाणी' को
गोद में बैठा कर
उसके बाल संवारती,
माँ-सी मौसी को ? ?

सड़कों पर कार दौड़ाती,
हॉर्न पर हॉर्न बजाती,
सुरक्षित, सकुशल
गन्तव्य तक पहुंचती, पहुंचाती,
ड्राइवर की सीट पर बैठी
आत्म-विश्वास से भरपूर
रश्मि को ???

किट्टी-पार्टी में जाने के लिये
सजती, संवरती,
नई सलवार में नाड़ा सरकाती,
पाँव के नाखूनों में
कुशल ब्यूटीशियन की तरह
नेल-पॉलिश लगाती;
बजते फोन को उल्लास से उठाती,
'हैलो आँटी' कह कर
स्नेहिल मुस्कान के साथ
बतियाती रश्मि को ???

अभ्यागतों का स्वागत, सम्मान करती,
अपने आराम की परवाह न कर के,
दूसरों को सुख पंहुचाती;
सुघड़ गृहिणी का धर्म
सम्पूर्ण कुशलता के साथ निभाती,
सामर्थ्य की साक्षात् मूर्ति बनी
रश्मि को ???

मेरे विषाद के क्षणों में
दिन-रात अपने सहयोग से
मेरी शक्ति का सम्बल बन
रश्मि !
तुम्हें अनेक अनेक धन्यवाद !
Yes,
RASHMI !
I love you and respect you
For all these easons.

Sharmistha

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