प्रिय रश्मि !
लो आज फिर
सुन्दर, सुहाना
और प्यारा-सा
जनम का दिन तुम्हारा
आ विराजा है ।
हवाओं की पलक पर बैठ कर
यह मुदित मन मेरा
तुम्हें
आशीष देता है
कि
तुम
सु:ख-शान्ति की मृदु पालकी में
बैठ कर
सुन्दर, सुखद जीवन बिताओ!
परम सौभाग्य को कर प्राप्त
यूँ ही सूर्य की रश्मि सरीखी
महकती मुस्कान बिखराओ ।
हमेशा खुश रहो !
शुभेच्छु
शर्मिष्ठा
लो आज फिर
सुन्दर, सुहाना
और प्यारा-सा
जनम का दिन तुम्हारा
आ विराजा है ।
हवाओं की पलक पर बैठ कर
यह मुदित मन मेरा
तुम्हें
आशीष देता है
कि
तुम
सु:ख-शान्ति की मृदु पालकी में
बैठ कर
सुन्दर, सुखद जीवन बिताओ!
परम सौभाग्य को कर प्राप्त
यूँ ही सूर्य की रश्मि सरीखी
महकती मुस्कान बिखराओ ।
हमेशा खुश रहो !
शुभेच्छु
शर्मिष्ठा
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