'कही सुनी'... ये मेरा blog है। यहाँ मैं कहूँगी... कुछ अपनी, कुछ जग की... और सुनूँगी... आप सभी की... जीवन की यात्रा, एक विचित्र यात्रा है। यहाँ हर समय, कुछ न कुछ घटता रहता है। कुछ अच्छा... कुछ बुरा... दोनों का अपना स्वाद है, अपना रस है। बेस्वाद कोई भी नहीं है। इन रसों का आस्वादन कराऊँगी मैं... अपनी इस 'कही सुनी' के माध्यम से... आप सभी को...
Wednesday, November 29, 2023
नीन्द
Tuesday, November 21, 2023
Sunday, November 19, 2023
Wednesday, November 1, 2023
रँजना नहींरही।
Wednesday, June 14, 2023
मैं…
नमन
आमन्त्रण
ऐ बादलों …
ऐ बादलों, रिमझिम के रँग लिये कहाँ चले
झूमती उमँग लिये, प्यार की पतँग लिये
जीया मोरे सँग लिये, कहाँ चले
ओहो ओ ओहो …
सनन-सनन पवन घूम-घूम के
बाँसुरी बजाये झूम-झूम के
??? कानों में कहे
प्यार करो, देखो न इनकार करो
अजी सुनो कहाँ चले
ओहो ओहो …
लचक-लचक फूलों की ये डालियाँ
जाने क्यूँ बजा रही हैं तालियाँ
दिल में कोई आके कहे
प्यार करो, देखो न इनकार करो
अजी सुनो कहाँ चले