मुझे मालूम है
गर्व-दीपित भाल पर शोभित
ये चन्दन का तिलक
तुम को बहुत प्रिय है।
ये सोने का सुनहरा हार,
यह शृंगार, मनहर चाल,
ये मनभावन अदायें,
ये सभी तुम को बहुत प्रिय हैं।
मुझे मालूम है।
और यह जो क्षणिक वैभव से
भरा आगार है,
यह सब तुम्हें प्रिय हैं,
मुझे मालूम है।
पर सखि! सुन लो ,
इन्हीं को ‘ग़र समेटोगी ,
तो रिश्ते चूक जायेंगे ।
और अपने छूट जायेंगे ।
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