Wednesday, June 14, 2023

मैं…

बादलों की पालकी में बैठ कर
हर साल सावन में
तुम्हारे द्वार पर
मैं आऊँगी ।

अटारी पर बरस कर,
खिड़कियों से झाँक कर,
फूलों में अपनी गन्ध बिखरा कर,
तुम्हें लोरी सुना कर,
गुनगुनी शुभ धूप के सहयोग से
फिर आसमाँ में लौट जाऊँगी।

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