Sunday, April 17, 2016

अन्तरंग एसोसियेशन

अन्तरंग एसोसियेशन...
कहूँ ?
ठलुआ मित्र-मण्डली ??
हा हा हा
कहूँ ?
परस्पर सद्भाव के साथ समय समय पर मिलते रहने वाले मित्रों की मण्डली ?
कहूँ ?
अकेलेपन को ढकेल कर परास्त करने की एक कोशिश ?
कहूँ ?
जमावड़ा कुछ पक्षियों का,
जो कभी
साथ चहके थे,
और उसी चहक को
बरकरार रखने का
उनका एक मनभावन प्रयास ?
कहूँ ?
एक ही प्रागण में खिले फूलों की
मुरझाने की वास्तविकता को नकारने की एक साज़िश ।

सच कहूँ तो
यह महफिल है
उन लोगों की,
जिन्होने साथ साथ
मिल-जुल कर
कुछ सपने देखे थे ।
उनमें कुछ सपने साकार हुये,
कुछ नहीं भी हुये ।
उन सभी सपनों की थाती संजो कर
कुछ और नये सपनों की संरचना में लगे
यह लोग...
जी हाँ,
हम लोग
ही हैं यह अन्तरंग एसोसियेशन ।
यह एसोसियेशन
सभी अभ्यागत सदस्यों का भव्य स्वागत करती है।

"साथ में सुकून है ।"
यह हमारा नारा है ।
इसलिये "सम्गच्छध्वम्"
की वैदिक विचार-धारा को
अक्षुण्ण बनाये रखते हुये
 हम मिलते रहेंगे ।
दिन-ब-दिन
माह-दर-माह
साल-दर-साल
यूँ ही
जब तक है जान ।

Saturday, April 16, 2016

गौरा की तपस्या

गौरा ! अतना तपवा कइलू एही तपसिया लागि के ना ।
भोजपुरी का यह गीत गौरा से प्रश्न कर रहा है ।



"गौरा !
इतना तप !!!
अपर्णा बन गई !!!
राजकुमारी हो कर भी ...
भूखी-प्यासी, तपस्या-रत ???
क्यों??
आखिर क्यों ??
क्या था ऐसा उस भोले भंडारी तपस्वी शिव में
जिसे पाने के लिये तुम
इतना कुछ कर गई ??"

"समझाना मुश्किल होगा मुझे।
तुम्हें भी समझना मुश्किल ही होगा ।
समझने के लिये तुम्हें मुझ-सी आँखें चाहिये
और मुझ ही सा दिल भी ।
तभी तुम देख पाओगे
उस तपस्वी की शोभा और सुषमा
और निरख पाओगे उस की मनोहर छवि ।
धड़कते दिल से महसूस कर पाओगे
उस मनोहर छवि को
जो मेरे पोर पोर में रम चुकी है ।
गंगा-सी पवित्र उसकी ईमानदारी ।
सराबोर हो चुकी हूँ उसमें ।
आकण्ठ मग्न हूँ  ?
डूब चुकी हूँ ।
मत पूछो " क्या है उसमें "
मैं कहती हूँ "क्या नहीं है उसमें " ।



Sunday, April 3, 2016

Australia ia a beautiful place .

Yes, Australia is a beautiful place...
I enjoy my stays here.
But I will be lying if I say I don't miss India.
Yes, India! I love you and miss you.
For me, you are my world.
Yes, in spite of all the dirt and dust.