Saturday, April 16, 2016

गौरा की तपस्या

गौरा ! अतना तपवा कइलू एही तपसिया लागि के ना ।
भोजपुरी का यह गीत गौरा से प्रश्न कर रहा है ।



"गौरा !
इतना तप !!!
अपर्णा बन गई !!!
राजकुमारी हो कर भी ...
भूखी-प्यासी, तपस्या-रत ???
क्यों??
आखिर क्यों ??
क्या था ऐसा उस भोले भंडारी तपस्वी शिव में
जिसे पाने के लिये तुम
इतना कुछ कर गई ??"

"समझाना मुश्किल होगा मुझे।
तुम्हें भी समझना मुश्किल ही होगा ।
समझने के लिये तुम्हें मुझ-सी आँखें चाहिये
और मुझ ही सा दिल भी ।
तभी तुम देख पाओगे
उस तपस्वी की शोभा और सुषमा
और निरख पाओगे उस की मनोहर छवि ।
धड़कते दिल से महसूस कर पाओगे
उस मनोहर छवि को
जो मेरे पोर पोर में रम चुकी है ।
गंगा-सी पवित्र उसकी ईमानदारी ।
सराबोर हो चुकी हूँ उसमें ।
आकण्ठ मग्न हूँ  ?
डूब चुकी हूँ ।
मत पूछो " क्या है उसमें "
मैं कहती हूँ "क्या नहीं है उसमें " ।



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