आमंत्रण का स्वर गूँजा है ।
मन हर्षित है,
तन पुलकित है ।
भय-बाधा सब दूर हो गई,
पीड़ा चकनाचूर हो गईं।
मन में इक आश्वस्ति जगी है।
कोलाहल सब दूर हो गया,
अँधियारा काफ़ूर हो गया।
सूरज वाली रात उगी है ।
नाद,नगाड़े और मृदंगम,
ताल-बद्ध होकर अभिनन्दन
करने को तत्पर हैं प्रति-क्षण।
नृत्योत्सुक यह चरण
थिरकने को आतुर हैं।
पायल की झनकार सुनी है।
आओ, स्वर-लहरी !
वितान बन जाओ
मेरे जीवन पर ।
प्रखर प्रहरी बन कर
सदैव जागे रहना,
मर्यादा में रह कर।
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