Wednesday, June 14, 2023

आमन्त्रण

आमंत्रण का स्वर गूँजा है ।
मन हर्षित है, 
तन पुलकित है ।

भय-बाधा सब दूर हो गई,
पीड़ा चकनाचूर हो गईं।
मन में इक आश्वस्ति जगी है।

कोलाहल सब दूर हो गया,
अँधियारा काफ़ूर हो गया।
सूरज वाली रात उगी है ।

नाद,नगाड़े और मृदंगम,
ताल-बद्ध होकर अभिनन्दन
करने को तत्पर हैं प्रति-क्षण।

नृत्योत्सुक यह चरण 
थिरकने को आतुर हैं।
पायल की झनकार सुनी है।

आओ, स्वर-लहरी !
वितान बन जाओ
मेरे जीवन पर ।

प्रखर प्रहरी बन कर 
सदैव जागे रहना,
मर्यादा में रह कर।

No comments:

Post a Comment