Sunday, November 19, 2023

छठ का पर्व
सुहाता है,
जब जल में खड़ी
व्रती महिला 
के दिव्य तेज से दीप्त, 
सुशोभित माथे पर
सिन्दूर संवर कर
अपनी छवि 
बिखराता है ।

“उगींऽऽ न सुरुज देव ऽ”
स्वर-लहरी,
भगवान् सूर्य को
शीघ्र प्रकट होने का 
आग्रह और मनुहार;

“बनीं न बलम जी कँहरिया”
कह कर छठी मैय्या से
“ पिया के सनेहिया”
बनने का आशीष-भरा
अनुपम उपहार;

फल-फूलों से भरे 
सूप को ले कर
जल में खड़ी
प्रार्थना-रत
व्रती महिला !
तुम को 
मेरा अभिनन्दन और वन्दन ।

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