'कही सुनी'... ये मेरा blog है।
यहाँ मैं कहूँगी... कुछ अपनी, कुछ जग की...
और सुनूँगी... आप सभी की...
जीवन की यात्रा, एक विचित्र यात्रा है।
यहाँ हर समय, कुछ न कुछ घटता रहता है।
कुछ अच्छा... कुछ बुरा...
दोनों का अपना स्वाद है, अपना रस है।
बेस्वाद कोई भी नहीं है।
इन रसों का आस्वादन कराऊँगी मैं...
अपनी इस 'कही सुनी' के माध्यम से...
आप सभी को...
Thursday, January 31, 2013
भटकन..
भव्य को पा लेने की भटकन
कहीं ख़त्म नहीं होती।
फिर भी हम भव्य की तलाश में
भटकते रहते हैं
उम्र-दर-उम्र..
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