Friday, January 18, 2013

सच कहो...

ज़िन्दगी के गद्य की गरिमा कहूं
या पद्य की मृदु -मंजरी?
सच कहो...
मैं क्या कहूं तुमको?

बादलों की शक्ल लेते वाष्प-कण की
सजल ऊष्मा के विरोधाभास को
जल-कण कहूं
या तप्त मरू?
सच कहो...
मैं क्या कहूं तुमको?

होंठ पर छलके महकते मुस्कुराहट के
मधुर मकरन्द को
प्रणय-आवेदन कहूं
या मात्र एक स्मिति?
सच कहो...
मैं क्या कहूं तुमको?

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