Monday, January 14, 2013

मैं और मेरा...

मेरे हिस्से का ये आकाश
मेरे ही सूर्य-शशि का भ्रमण-स्थल है।
किसी का भी उपग्रह हो...
मेरे आकाश में सबका प्रवेश निषिद्ध है।
ये मेरे ही सुखद आलोक का संक्रमण-स्थल है।
हवाओं की पलक पर बैठ कर
मैं स्वयं के आकाश की ऊंचाइयों को नाप आती हूं।
ये मेरे ही सजाये स्वप्न की बारादरी है।

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