घरौंदों में बिके बैठे,
ये थोड़े-से बड़े बौने,
मेरी इस साफ-सुथरी नाक को ही
तोड़ देने को विकल हैं।
किन्तु मेरे देह की काठी
इन्हें चरणाग्र में नत-शिर बना
दहलीच भी छूने नही देती।
ये मेरी नाक तो क्या तोड़ पायेंगे।
ये थोड़े-से बड़े बौने,
मेरी इस साफ-सुथरी नाक को ही
तोड़ देने को विकल हैं।
किन्तु मेरे देह की काठी
इन्हें चरणाग्र में नत-शिर बना
दहलीच भी छूने नही देती।
ये मेरी नाक तो क्या तोड़ पायेंगे।
No comments:
Post a Comment