न जाने क्यों...
किन्हीं ऊंचे घरों में बस रहे
ये लोग
मुझको देख कर क्यों हँस रहे हैं?
कि मैं बदशक्ल हूँ...
बदरंग हूँ...
और बेवज़ह हूँ...
इसलिये ये लोग मुझको देख कर यूँ हँस रहे हैं।
किन्हीं ऊंचे घरों में बस रहे
ये लोग
मुझको देख कर क्यों हँस रहे हैं?
कि मैं बदशक्ल हूँ...
बदरंग हूँ...
और बेवज़ह हूँ...
इसलिये ये लोग मुझको देख कर यूँ हँस रहे हैं।
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