Friday, April 5, 2013

अभिनन्दन

श्रीमती शशिप्रभा ओझा एवम् श्री बृजेश नारायण ओझा जी के शुभ-विवाह का स्वर्ण-जयन्ती-समारोह

सागर की गहराइयों को चीर कर समुद्र-मन्थन से निकले चन्द्रमा की शीतल किरणों की तरह शीतल, सुखद एवम् सुन्दर स्वभाव की श्रीमती शशिप्रभा का जन्म स्वर्गीय श्री बलराम पाण्डे एवम् स्वर्गीया श्रीमती रामशृंगारी पाण्डे की तृतीय सन्तान के रुप में हुआ।

आज से ठीक पचास वर्ष पूर्व २१ अप्रैल, १९६३ को आपका शुभ-विवाह श्री बृजेश नारायण ओझा, सुपुत्र स्वर्गीय श्री भागवत ओझा एवम् स्वर्गीया श्रीमती जतना देवी ओझा, के साथ वैदिक विधि से सम्पन्न हुआ था। फूलों के गहनों से सजी-संवरी, गोटे-जड़ी पीली साड़ी पहन कर दुल्हन बनी शशिप्रभा एवम् दूल्हे के पारम्परिक परिधान में सुसज्जित बृजेश नारायण जी की सलोनी छवि आज भी हम सब की यादों में सजग है। आज का दिन आप दोनों के विवाह की स्वर्ण-जयन्ती का दिन है। इस अवसर पर आप दोनों को हम सभी की ओर से कोटिशः बधाई।

इन पचास वर्षों में आप दोनों ने एक-दूसरे का साथ पूरी निष्ठा एवम् ईमानदारी के साथ निभाया है। सरलता एवम् सहजता आप दोनों के चरित्र की विशिष्टता है। झूठी शान-शौकत से कोसों दूर रह कर अपने कर्तव्य-पथ पर अडिग रह कर सच्चाई-पूर्वक अपना धर्म निभाना ही आप दोनों के जीवन का लक्ष्य रहा है। तक़दीर की आँखों में आँखें डाल कर आप दोनों हर उस ताकत से लड़ते रहे, जो आप की राह का रोड़ा बन सकती थी। सब के सुख-दुख में सहभागी बन कर आप दोनों सभी के खुशी-ग़म में शामिल होते रहे हैं।

आज के दिन हम सभी आप दोनों के लिये स्वस्थ, सुखी एवम् उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं और भगवान से यह प्रार्थना करते हैं कि ढेर सारी खुशियाँ आप दोनों के जीवन में आयें।

धन्यवाद।
शुभेच्छु,
आपकी बहन - शर्मिष्ठा शर्मा

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