आज सुबह...
पीले कपड़ों में सजी-धजी
अवनी को देखा...
लगा मुझे
मधुमास जगा है...
लगा मुझे
कोयल कूहकी है...
लगा मुझे
कोंपल फूटी है...
लगा मुझे
चिड़िया चहकी है...
लगा मुझे
बगिया महकी है...
लगा मुझे
चाँदनी छिटक कर आसमान से
धरती पर ही पसर गयी है...
चुलबुल, नटखट, शोख़, सलोनी अवनी
तुम हो फूल गेंदा फूल।
पीले कपड़ों में सजी-धजी
अवनी को देखा...
लगा मुझे
मधुमास जगा है...
लगा मुझे
कोयल कूहकी है...
लगा मुझे
कोंपल फूटी है...
लगा मुझे
चिड़िया चहकी है...
लगा मुझे
बगिया महकी है...
लगा मुझे
चाँदनी छिटक कर आसमान से
धरती पर ही पसर गयी है...
चुलबुल, नटखट, शोख़, सलोनी अवनी
तुम हो फूल गेंदा फूल।

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