Monday, February 11, 2013

मैं क्या करूँ?

जाग जाग कर मन परेशान हो गया है।
अब तो सोने का मन हो रहा है।
मगर मन की परेशानी मुझे सोने नहीं देती।
और जागते रहने से मन और परेशान हो जाता है।

तो मैं क्या करूँ?
सपने देखूँ???

परन्तु सपने देखने के लिये भी तो सोना ज़रूरी है।
जागती आँखों में भला सपने कब आ पाते हैं।
सपने तो मुंदी पलकों में ही रहते हैं।
पलक खुलते ही सपनें दफ़न हो जाते हैं।
तो अब तुम ही कहो!
मैं क्या करूँ???

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