Monday, February 25, 2013

भगवान के प्रति...

तुम्हें भी क्या कहूँ आनन्द-घन!
तुम तो बहुत बरसे हो जीवन में।
ये हरियाली तुम्हारी ही कृपा का दिव्य फल है,
और चलती साँस भी तो दान है तेरा कृपालु!
निराली छवि तुम्हारी साथ रहती है
तो ये धरती भी अम्बर-सी
मुझे महसूस होती है।

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