आज ही के दिन
परम पिता परमेश्वर की असीम अनुकम्पा से
जीवनसाथी के रुप में
श्री रजनीश प्रकाश का साथ मुझे मिला था ।
कहूँ?
हीरा ही मिल गया था।
नायाब हीरा !!
परखने में थोड़ा समय लगा।
पर,सच कहूँ ?
इसी नायाब हीरे ने मुझे जौहरी बना दिया।
भगवान से प्रार्थना है कि वह इन्हें स्वस्थ, सुखी एवम् दीर्घायु बनाये।
परमेश्वर ने मुझे एक पुत्र और एक पुत्री के रुप में दो अनमोल रत्न भी दिये।
पुत्र हिमांशु अपनी पत्नी अनुरिता, पुत्र ईशान एवम् पुत्री अनिका के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं ।
पुत्री रुचि अपने पति सिद्धार्थ एवम् पुत्री अवनि के साथ अमेरिका में रहती हैं ।
मैं हमेशा हमेशा इन दोनों के मंगलमय जीवन की कामना करती हूँ।
मुझे अपने माता-पिता, सास-ससुर, भाइयों- बहनों,
उनके बच्चों एवम् अपने मित्रों से हमेशा ही अपार स्नेह मिला है। इस स्नेह को पा कर मेरा मन गदगद है।
आप सभी अभ्यागतों का मैं स्वागत करती हूँ।
अपनी उपस्थिति से आपने हमें सम्मानित किया है।
इसके लिये मैं आपकी आभारी हूँ।
और अन्त में
नतमस्तक हूँ उस सर्व-शक्तिमान सत्ता के प्रति, जो पूरे संसार को चलाता है ।
उस कृपालु परमेश्वर को कोटिशः धन्यवाद।
शर्मिष्ठा शर्मा
No comments:
Post a Comment