Sunday, May 22, 2022

मेरी कहानी

कहानी है
मेरे बीते दिनों की,
 व्यस्तताओं की,  
निरे ख़ालीपन की;
लड़कपन की, जवानी की,
बुढ़ापे की तरफ़ बढ़ते पगों की ;
चहचहाते शिशु-खगों की
और ख़ाली  नीड़ की।

सब कुछ समर्पित है तुम्हें जगदीश !
क्योंकि ये सब कुछ
तुम्हारा ही दिया वरदान है।

आँख होगी बन्द जब 
कुछ भी न होगा साथ तब।
मेरे जगदीश !
तुम उस वक़्त भी
रहना मेरे ही साथ में ।
वो वैतरणी तुम्हीं तो पार करवाओगे कान्हा !


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