उगते सूरज की सुन्दरता सब निरखते हैं, सराहते हैं ।
लेकिन डूबता सूरज !!!
कभी देखी है डूबते सूरज की सुन्दरता ???
भव्य, शान्त, शालीन ।
आकाश की सच्चाइयों को परखा, देखा-भाला सूरज !
जानता है आकाश के सारे राज़ ,
उसकी, ऊँचाई, गहराई, दूरी ;
उसके नीले आसमानी रंग का रहस्य ,
राजदार बन चुका है वह आसमान का ।
क्या नहीं जानता उसके बारे में ।
काले, गोरे सारे चिट्ठे ।
सभी का गवाह है वह ।
साक्षी है सभी धटनाओं का ।
सभी घटनायें उसके रूबरू घटी हैं ।
टूटे तारों की मनोव्यथा;
या फिर भोर के तारों की कथा;
सभी के सपनों का साझीदार रहा है वह ।
आकाश के सभी कोने झाँक आया है वह ।
कुछ भी तो उससे अछूता नहीं रह गया ।
बेहद अन्तरंग हो गया है वह उसका ।
अब झट से डूबेगा ...
लाल बिन्दिया का रूप धर कर ।
ओह ! कितनी सलोनी सुषमा है उसकी ।
देखते के देखते आँखो से ओझल ।
आँखें तकती की तकती रह गईं।
और वह डूब गया ।
आँखें अभी भी ढूंढ रहीं हैं...
कहाँ गया वह ??
अभी तो यहीं था ।
घबराओ मत ।
कल फिर वह आयेगा ।
अपनी पूरी आन, बान, और शान के साथ ।
तब तक इन्तज़ार करो ।
लेकिन डूबता सूरज !!!
कभी देखी है डूबते सूरज की सुन्दरता ???
भव्य, शान्त, शालीन ।
आकाश की सच्चाइयों को परखा, देखा-भाला सूरज !
जानता है आकाश के सारे राज़ ,
उसकी, ऊँचाई, गहराई, दूरी ;
उसके नीले आसमानी रंग का रहस्य ,
राजदार बन चुका है वह आसमान का ।
क्या नहीं जानता उसके बारे में ।
काले, गोरे सारे चिट्ठे ।
सभी का गवाह है वह ।
साक्षी है सभी धटनाओं का ।
सभी घटनायें उसके रूबरू घटी हैं ।
टूटे तारों की मनोव्यथा;
या फिर भोर के तारों की कथा;
सभी के सपनों का साझीदार रहा है वह ।
आकाश के सभी कोने झाँक आया है वह ।
कुछ भी तो उससे अछूता नहीं रह गया ।
बेहद अन्तरंग हो गया है वह उसका ।
अब झट से डूबेगा ...
लाल बिन्दिया का रूप धर कर ।
ओह ! कितनी सलोनी सुषमा है उसकी ।
देखते के देखते आँखो से ओझल ।
आँखें तकती की तकती रह गईं।
और वह डूब गया ।
आँखें अभी भी ढूंढ रहीं हैं...
कहाँ गया वह ??
अभी तो यहीं था ।
घबराओ मत ।
कल फिर वह आयेगा ।
अपनी पूरी आन, बान, और शान के साथ ।
तब तक इन्तज़ार करो ।
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