अवनी...
मेरी दो महीने की नातिन...
अपने पालने में सो रही है।
अपनी बन्द पलकों की छावँ में
कौन से सपने देख रही है...
काश ! मैं यह जान पाती।
कभी कभी गहरी नींद में ही
अचानक ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है...
क्या डर है उसका...
काश! मैं यह समझ पाती।
मगर
उसके सपने...
उसका डर...
उसके हैं...
सिर्फ़ उसके....
बहुत बार मुस्कुराती भी है...
कान से कान तक की
चौड़ी मुस्कुराहट...
सच कहूँ ???
उस समय ...
मैं तो मैं...
पूरा कमरा मुस्कुरा उठता है।
आजकल...
उसके होठों पर...
कुछ निरर्थक शब्द भी...
चहकने लगे हैं।
यक़ीन मानिये...
जब वह चहकती है...
तो पूरा शिकागो शहर...
चहचहाने लगता है।

Emotions captured beautifully and aptly... Luv you Maa.
ReplyDelete~ Ruchi