यही वह रास्ता है
जो मेरे मन की
चहरदीवार के भीतर भी जाता है।
बहुत से राज़ हैं भीतर;
क्रन्दन, कराहें और टूटे ख़्वाब
हैं भीतर।
मेरी मुस्कराती आँखों के किनारों पर
कहीं एक झील है;
नमकीन जल की झील;
मुझे डर है,
तुम्हारे झाँकते ही
झील का नमकीन पानी
अश्रु बन कर बह पड़ेगा ।
यही बेहतर है
कि तुम
आँखें चुरा कर ही रहो ।
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