Wednesday, January 17, 2024

मेरी आँखें

मेरी आँखों में मत झाँकों ।
यही वह रास्ता है
जो मेरे मन की
चहरदीवार के भीतर भी जाता है।
बहुत से राज़ हैं भीतर;
क्रन्दन, कराहें और टूटे ख़्वाब 
हैं भीतर।

मेरी मुस्कराती आँखों के किनारों पर
कहीं एक झील है;
नमकीन जल की झील;

मुझे डर है,
तुम्हारे झाँकते ही
झील का नमकीन पानी
अश्रु बन कर बह पड़ेगा ।

यही बेहतर है
कि तुम
 आँखें चुरा कर ही रहो ।







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