सूर्य की रश्मि-सरीखी,
मृदुल, मधु-मुस्कान बिखराती,
सखी मेरी,
मुझे बेहद लुभाती है ।
मेरी प्रतिवेशिनी है वह,
मगर,
षड्-रृतु -सरीखी
साल में छः बार ही
वह दीख पाती है ।
निराली , शोख , चंचल,
और बहुत मासूम-सी
जब भी
वो मिलती है,
वही मीठी अदायें...
क्या करूँ ???
मन मोह लेती है ।
मृदुल, मधु-मुस्कान बिखराती,
सखी मेरी,
मुझे बेहद लुभाती है ।
मेरी प्रतिवेशिनी है वह,
मगर,
षड्-रृतु -सरीखी
साल में छः बार ही
वह दीख पाती है ।
निराली , शोख , चंचल,
और बहुत मासूम-सी
जब भी
वो मिलती है,
वही मीठी अदायें...
क्या करूँ ???
मन मोह लेती है ।
साल मे छ; बार दीखती तो है इसीमें खुश रहना चाहिए :P
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