कल-कल-निनादिनी
सरिता-सी चंचल,
निश्छल , गतिशील ,
सखी मेरी,
मुझको
प्रतिदिन
करती हतप्रभ
अपने चक्रासन और शीर्षासन से ।
ठगी-सी मैं
निहारती हूँ
उसको अपलक
प्रतिदिन
औ' सोचती हूँ
कि
"हे भगवन् !
बोलो
कर पाऊंगी
ऐसा कुछ कुछ
मैं भी
इस जीवन में
या
जन्म दुबारा लेना होगा ???
सरिता-सी चंचल,
निश्छल , गतिशील ,
सखी मेरी,
मुझको
प्रतिदिन
करती हतप्रभ
अपने चक्रासन और शीर्षासन से ।
ठगी-सी मैं
निहारती हूँ
उसको अपलक
प्रतिदिन
औ' सोचती हूँ
कि
"हे भगवन् !
बोलो
कर पाऊंगी
ऐसा कुछ कुछ
मैं भी
इस जीवन में
या
जन्म दुबारा लेना होगा ???
आप ने मेरे बारे मे इतना सोचा इसके लिये शुक्रिया! इस जीवन मे ही सब कर लेगी :)
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