Monday, September 30, 2013

कहानी है...

कहानी है
निरे खालीपने की ,
व्यस्तताओं की,
दुआओं की,
जो हरपल सांस में रस बस रही है;
धड़कनें की ताल पर
हरदम थिरकती
कल्पनाओं की ।
कहीं दूरस्थ देशों में
बसे बैठे
प्रियों के
अनकहे,
बनते, बिगड़ते
स्वप्न-जालों की ।
किन्ही बीते पलों की
मधुर स्मृतियोंकी ।
किन्ही अनजान, अनचिन्ही,
मगर मासूम सी,
अनगढ, उभरती,
स्वप्निकाओं की ।
ये खालीपन मेरा,
मुंझको लुभाता है, रिझाता है ।
यही तो ढाल है मेरी,
जो मेरी अस्मिता को चोट खाने से बचाता है।
इसलिये यह प्रिय मुझे है ।

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