Tuesday, May 24, 2016

हमारे योग-शिक्षक श्री राहुल रंजन दुबे के बिदाई के अवसर पर प्रस्तुत बिदाई-पत्र

माननीय श्री राहुल रंजन दुबे जी !

सामने सुन्दर सुहानी-सी डगर इक दिख रही है ;
डगर के पार की मंज़िल भी इतनी सुहानी और सुन्दर हो !
यही जगदीश से है प्रार्थना हम योग-शिष्यों की ।

ये सच है, शिष्य हैं हम ;
उम्र में काफी बड़े हैं आपसे ।
इसी अधिकार से आशीष देते हैं कि
राहुल जी !
बढो आगे ! फलो-फूलो !
ये जीवन एक बगिया है;
कि इसमें नित नयी कलियाँ  खिलें !
खुशियों की बारिश हो !
फलों के वृक्ष हों
और गन्ध हो मकरन्द की !
यही जगदीश से है प्रार्थना
हम योग-शिष्यों की ।

ये जीवन इक समर है
और इसमें बहुत-से संघर्ष के क्षण हैं ।
प्रबल संघर्ष के उलझे समर में
जीतने की शक्ति दें भगवान !
यही जगदीश से है प्रार्थना
हम योग-शिष्यों की ।

ये जीवन इक सफारी है
किन्ही बीहड़ वनों की ।
और इसमें बहुत-से मन-भावने, सुन्दर-सुहाने
लालचों के व्याघ्र भी हैं घूमते ।
बहुत मुश्किल है इन सब से निपट पाना ।
मगर
Sir!
योग की शिक्षा के शस्त्रों से समन्वित आप
इन सब पर विजय कर प्राप्त
अपनी दुन्दुभी चहुँ-दिश बजायेंगे !
यही है कामना,
आशिर्वचन भी
हम सभी का ।
                                                 धन्यवाद
भवदीय                                                        
योग-शिष्य

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